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मंगलवार, 23 मई 2017

whatsapp वायरल 777888999 से कॉल अफवाह या सच

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 सोशल मीडिया पर अक्सर भ्रामक और चौंकने वाली खबरें वायरल होने लगती हैं, हालांकि लोग इन खबरों की बिना पुष्टि किये ही लोग कई लोगों को भेज देते हैं। कुछ ऐसी ही एक खबर सोशल साइट और व्हाट्स ऐप ग्रुप्स पर वायरल हो रही है। बताया जा रहा है कि 777888999 नंबर की कॉल उठाने पर आपका फोन ब्लास्ट हो जाएगा और आपकी मौत हो जाएगी। ऐसी कॉल को रिसीव ना करने का अलर्ट बहुत तेज से वायरल किया जा रहा है।

सोमवार, 22 मई 2017

छिपकली को घर से भगाये ये उपाय अपना कर

kya aap bhi ghar me chhilake se paresan hai to apnaye ye saral upay

घर से छिपकली भगाने के लिए अपनाएं ये 6 घरेलू नुस्खे



घर की दीवारों पर आपने कई बार छिपकली को चलते देखा होगा। लेकिन बार बार भगाने के बाद भी अगर आपके घर में छिपकली दिखती है तो आप भी अपनाएं ये घरेलू नुस्खे, जिसके बाद आपके घर में फिर कभी छिपकली नजर नहीं आएगी।

शनिवार, 13 मई 2017

छाछ पिने से होते है इतने फायदे !!battermilk benefits in hindi!!health tips and tricks!!


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hello friend's
        buttermilk benefits in hindi
लस्सी मट्ठा और छाछ गर्मी के मौसम का अमृत समान शीतल पेय माना गया है। इसका प्रयोग कई तरह से अलग-अलग तरह की शारीरिक परेशानियों में किया जा सकता है। साथ ही यह सौंदर्य बढ़ाने में भी मदद करता है। वे इस प्रकार हैं –
राहतः गर्मी में रोजाना दो बार पतले छाछ में भूना हुआ जीरा मिलाकर पीने से काफी राहत मिलती है।

उल्टीः गर्मी की वजह से बार-बार उल्टी आने पर इसे ठीक करने का घरेलू उपाय छाछ है। इसमें जायफल घीसकर पीने से उल्टी बंद हो जाती है।
हिचकीः बार-बार हिचकी आने की स्थिति में छाछ में एक चम्मच सोंठ मिलाकर पीने से हिचकी बंद हो जाती है।
रक्तचापः छाछ के साथ गिलोय के चूर्ण को मिलाकर पीने से आराम मिलता है।
याद्दास्त: सुबह-शाम छाछ या दही को पतला कर पीने से स्मरण शक्ति बढ़ जाती है। यह विद्यार्थियों के लिए काफी फायदेमंद होता है।
तनावः अत्यधिक मानसिक तनाव में भी छाछ का सेवन लाभकारी होता है।
झुर्रियां: चेहरे की झुर्रियों को कम करने के लिए छाछ में आटा मिलाकर लेप करने से फायदा मिलता है।
मुंहासेः गुलाब की जड़ को छाछ में पीसकर चेहरे पर लगाने से चेहरे के मुहांसे ठीक हो जाते हैं।
फटी एडियां: पैरों की एडि़यों के फटने पर छाछ का ताजा मक्खन लगाने से आराम मिलता है।
मोटापाः छाछ का इस्तेमाल शरीर के वजन को कम करने के लिए भी किया जा सकता है। इसके लिए छाछ को छौंककर सेधा नमक डालकर पीना चाहिए। इससे चर्बी कम होती है और मोटापा कम होता है।
जलनाः जले हुए स्थान पर छाछ का इस्तेमाल तुरंत मल देने से फफोले नहीं बनते हैं और जलन की पीड़ा कम हो जाती है।
खुजलीः छाछ में अमलतास के पत्ते को पीसकर लगाने के कुछ देर बाद स्नान कर लेने से खुजली नष्ट हो जाती है।

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शुक्रवार, 12 मई 2017

क्या आप भी फ्रिज का पानी पीते है तो इसे जरूर पड़े !! Do you also drink fridge water ?

फ्रिज का ठंडा पानी पीने से पहले जरूर पढ़ लीजिये इसके नुकसान

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आखिर क्यों नही पीना चाहिए बर्फ जैसा ठंडा पानी

 गर्मियों का मौसम चल रहा है और गर्मियों का मौसम आते ही सभी का ठंडा पानी पीने का मन करता है| बाहर चिलचिलाती धूप की गर्मी ओर ऊपर से लू की चपेटे खाने के बाद घर आते ही ठंडा पानी पीने की तलब लगती है |ठंडा पानी पीने से थोड़े समय के लिए गर्मी से राहत तो जरूर मिलती है लेकिन नियमित रूप से बर्फ जैसा ठंडा पानी पीने से आपको कई नुकसान हो सकते है

शनिवार, 7 जनवरी 2017

IPC की धाराओ के मतलब और भारतीय नागरिको को संविधान में दिए ऐसे अधिकार जिन्हें आप नही जानते

hello friends
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*जानिए IPC में धाराओ का मतलब .....*
*धारा 307* = हत्या की कोशिश
*धारा 302* = हत्या का दंड
*धारा 376* = बलात्कार
*धारा 395* = डकैती
*धारा 377* = अप्राकृतिक कृत्य
*धारा 396* = डकैती के दौरान हत्या
*धारा 120* = षडयंत्र रचना
*धारा 365* = अपहरण
*धारा 201* = सबूत मिटाना
*धारा 34*   = सामान आशय
*धारा 412* = छीनाझपटी
*धारा 378* = चोरी
*धारा 141* = विधिविरुद्ध जमाव
*धारा 191* = मिथ्यासाक्ष्य देना
*धारा 300* = हत्या करना
*धारा 309* = आत्महत्या की कोशिश
*धारा 310* = ठगी करना
*धारा 312* = गर्भपात करना
*धारा 351* = हमला करना
*धारा 354* = स्त्री लज्जाभंग
*धारा 362* = अपहरण
*धारा 415* = छल करना
*धारा 445* = गृहभेदंन
*धारा 494* = पति/पत्नी के जीवनकाल में पुनःविवाह0
*धारा 499* = मानहानि
*धारा 511* = आजीवन कारावास से दंडनीय अपराधों को करने के प्रयत्न के लिए दंड।
 ▫▪▫▪▫▪▫▪
हमारेे देश में कानूनन कुछ ऐसी हकीक़तें है, जिसकी जानकारी हमारे पास नहीं होने के कारण  हम अपने अधिकार से मेहरूम रह जाते है।

   तो चलिए ऐसे ही कुछ
*पांच रोचक फैक्ट्स* की जानकारी आपको देते है,
जो जीवन में कभी भी उपयोगी हो सकती है.

*(1)  शाम के वक्त महिलाओं की गिरफ्तारी नहीं हो सकती*-
कोड ऑफ़ क्रिमिनल प्रोसीजर, सेक्शन 46 के तहत शाम 6 बजे के बाद और सुबह 6 के पहले भारतीय पुलिस किसी भी महिला को गिरफ्तार नहीं कर सकती, फिर चाहे गुनाह कितना भी संगीन क्यों ना हो. अगर पुलिस ऐसा करते हुए पाई जाती है तो गिरफ्तार करने वाले पुलिस अधिकारी के खिलाफ शिकायत (मामला) दर्ज की जा सकती है. इससे उस पुलिस अधिकारी की नौकरी खतरे में आ सकती है.

*(2.) सिलेंडर फटने से जान-माल के नुकसान पर 40 लाख रूपये तक का बीमा कवर क्लेम कर सकते है*-

पब्लिक लायबिलिटी पॉलिसी के तहत अगर किसी कारण आपके घर में सिलेंडर फट जाता है और आपको जान-माल का नुकसान झेलना पड़ता है तो आप तुरंत गैस कंपनी से बीमा कवर क्लेम कर सकते है. आपको बता दे कि गैस कंपनी से 40 लाख रूपये तक का बीमा क्लेम कराया जा सकता है. अगर कंपनी आपका क्लेम देने से मना करती है या टालती है तो इसकी शिकायत की जा सकती है. दोषी पाये जाने पर गैस कंपनी का लायसेंस रद्द हो सकता है.

*(3) कोई भी हॉटेल चाहे वो 5 स्टार ही क्यों ना हो… आप फ्री में पानी पी सकते है और वाश रूम इस्तमाल कर सकते है*-

इंडियन सीरीज एक्ट, 1887 के अनुसार आप देश के किसी भी हॉटेल में जाकर पानी मांगकर पी सकते है और उस हॉटल का वाश रूम भी इस्तमाल कर सकते है. हॉटेल छोटा हो या 5 स्टार, वो आपको रोक नही सकते. अगर हॉटेल का मालिक या कोई कर्मचारी आपको पानी पिलाने से या वाश रूम इस्तमाल करने से रोकता है तो आप उन पर कारवाई  कर सकते है. आपकी शिकायत से उस हॉटेल का लायसेंस रद्द हो सकता है.

 *(4) गर्भवती महिलाओं को नौकरी से नहीं निकाला जा सकता*-

मैटरनिटी बेनिफिट एक्ट 1961 के मुताबिक़ गर्भवती महिलाओं को अचानक नौकरी से नहीं निकाला जा सकता. मालिक को पहले तीन महीने की नोटिस देनी होगी और प्रेगनेंसी के दौरान लगने वाले खर्चे का कुछ हिस्सा देना होगा. अगर वो ऐसा नहीं करता है तो  उसके खिलाफ सरकारी रोज़गार संघटना में शिकायत कराई जा सकती है. इस शिकायत से कंपनी बंद हो सकती है या कंपनी को जुर्माना भरना पड़ सकता है.

*(5) पुलिस अफसर आपकी शिकायत लिखने से मना नहीं कर सकता*

आईपीसी के सेक्शन 166ए के अनुसार कोई भी पुलिस अधिकारी आपकी कोई भी शिकायत दर्ज करने से इंकार नही कर सकता. अगर वो ऐसा करता है तो उसके खिलाफ वरिष्ठ पुलिस दफ्तर में शिकायत दर्ज कराई जा सकती है. अगर वो पुलिस अफसर दोषी पाया जाता है तो उसे कम से कम *(6)*महीने से लेकर 1  साल तक की जेल हो सकती है या फिर उसे अपनी नौकरी गवानी पड़ सकती है.

*इन रोचक फैक्ट्स को हमने आपके लिए ढूंढ निकाला है*.

ये वो रोचक फैक्ट्स है, जो हमारे देश के कानून के अंतर्गत आते तो है पर हम इनसे अंजान है. हमारी कोशिश होगी कि हम आगे भी ऐसी बहोत सी रोचक बाते आपके समक्ष रखे, जो आपके जीवन में उपयोगी हो।

शनिवार, 31 दिसंबर 2016

BHIM app @ कैसे use और डाऊनलोड करे apne moblile ko banaye apna wallets

hello friends
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Bhim apps PM narendra modi me cashless india ki or ek kamad bina internet se chalne wali apps lounch ki hai.

गुरुवार, 22 दिसंबर 2016

सर्दियो में गुड़ खाने से होते है ये लाभ

hello friends
सर्दियो में गूड़ खाने से होते है ये लाभ
P 🙏गुड़ खाने से 18 फायदे :🙏


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1- गुड़ खाने से नहीं होती गैस
की दिक्कत

2- खाना खाने के बाद अक्सर
मीठा खाने का मन करता हैं।
इसके लिए सबसे बेहतर है
कि आप गुड़ खाएं। 
गुड़ का सेवन करने से आप
हेल्दी रह सकते हैं

3 - पाचन क्रिया को सही रखना

4 - गुड़ शरीर का रक्त साफ
करता है और मेटाबॉल्जिम
ठीक करता है। 
रोज एक गिलास पानी या दूध
के साथ गुड़ का सेवन पेट को
ठंडक देता है। इससे गैस की
दिक्कत नहीं होती। 
जिन लोगों को गैस की परेशानी है, 
वो रोज़ लंच या डिनर के बाद
थोड़ा गुड़ ज़रुर खाएं..

5 - गुड़ आयरन का मुख्य स्रोत है। 
इसलिए यह एनीमिया के मरीज़ों 
के लिए बहुत फायदेमंद है।
खासतौर पर महिलाओं के
लिए इसका सेवन बहुत
अधिक ज़रुर है.


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6 - त्वचा के लिए, गुड़ ब्लड से
खराब टॉक्सिन दूर करता है,
जिससे त्वचा दमकती है और
मुहांसे की समस्या नहीं होती है।

7 - गुड़ की तासीर गर्म है,
इसलिए इसका सेवन जुकाम
और कफ से आराम दिलाता है। 
जुकाम के दौरान अगर आप
कच्चा गुड़ नहीं खाना चाहते हैं
तो चाय या लड्डू में भी
इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।

8 - एनर्जी के लिए -बुहत
ज़्यादा थकान और कमजोरी
महसूस करने पर गुड़ का
सेवन करने से आपका एनर्जी
लेवल बढ़ जाता है। 
गुड़ जल्दी पच जाता है, इससे
शुगर का स्तर भी नहीं बढ़ता.
दिनभर काम करने के बाद
जब भी आपको थकान हो,
तुरंत गुड़ खाएं।

9 - गुड़ शरीर के टेंपरेचर को
नियंत्रित रखता है। 
इसमें एंटी एलर्जिक तत्व हैं,
इसलिए दमा के मरीज़ों के
लिए इसका सेवन काफी
फायदेमंद होता है।

10 - जोड़ों के दर्द में आराम--
रोज़ गुड़ के एक टुकड़े के
साथ अदरक का सेवन करें,
इससे जोड़ों के दर्द की
दिक्कत नहीं होगी।

11- गुड़ के साथ पके चावल
खाने से बैठा हुआ गला व
आवाज खुल जाती है।

12 - गुड़ और काले तिल के
लड्डू खानेसे सर्दी में अस्थमा
की परेशानी नहीं होती है।

13 - जुकाम जम गया हो, तो
गुड़ पिघलाकर उसकी पपड़ी
बनाकर खिलाएं।

14 - गुड़ और घी मिलाकर खाने 
से कान का दर्द ठीक हो जाता है।

15 - भोजन के बाद गुड़ खा
लेने से पेट में गैस नहीं बनती. 
16 - पांच ग्राम सौंठ दस ग्राम
गुड़ के साथ लेने से पीलिया
रोग में लाभ होता है।

17 - गुड़ का हलवा खाने से
स्मरण शक्ति बढती है।

18 - पांच ग्राम गुड़ को इतने ही 
सरसों के तेल में मिलाकर खानेसे 
श्वास रोग से छुटकारा मिलता है।
🍀 अच्छी बातें, अच्छे लोग,
अपने मित्र, रिश्तेदार और ग्रुप
मे अवश्य शेयर करे.
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बुधवार, 21 दिसंबर 2016

अगर आप सुबह ख़ाली पेट चाय पिते है तो पड़े ये

health tips  in hindi
नमस्कार दोस्तों 
आज हम आपको बताएंगे की ख़ाली पेट चाय पिने से क्या नुकसान होता है ।
आज भारत में 90 %जनता ख़ाली पेट चाय पीती है ।जो की सेहत के लिए बहोत खतरनाक है ।
ek reasurch ke anusar
 यदि आप खाली पेट चाय पियेंगे तो इसके बहुत से दुष्प्रभाव भी हैं जो आपको कुछ समय के बाद परेशान कर सकते हैं। इसका नुकसान गर्मी के समय जादा देखने को मिलता है। कैफिन, एलथायनिन और थियोफाइलिन जैसे पदार्थ चाय में पाये जाते हैं और जब यह हमारे शरीर में प्रवेश करते हैं तो हम उत्तेजित हो जाते हैं।
बहुत लोग सुबह-सुबह ही कई कप चाय पी जाते हें और यह रोज़ की आदत हमारे पाचन तंत्र पर गहरा प्रभाव डालती है। ऐसा देखा गया है कि दूध वाली चाय जादा हानिकारक होती है। मीठे के शौकीन लोग चाय में ज्यादा मीठा डालकर पीते हैं जो हमारा वज़न बढ़ता है और मोटापा पैदा करता है। तो आइए चाय को खाली पेट पीने के और नुकसानों के बारे में जानते हैं |
1.दूध वाली चाय न पिये
भारत में हम सब लोग चाय में दूध ज़रूर डालते हैं यदि हम बाहर के देशों में देखें तो ऐसा कम होता है। इससे हमारे शरीर पर प्रभाव पड़ता है और हम थका हुआ महसूस करते हैं। इससे थोड़ा चिड़चिड़ा और परेशान भी महसूस करते हैं। तो कोशिश करें कि चाय में दूध ना डालें।

मंगलवार, 13 दिसंबर 2016

internet के बिना भी paytm से पैसे ट्रांसफर करे

hello friends
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Note bandi के बाद आम आदमी को बहोत दिक्कत हो रही है ऐसे में paytm का चलन ज्यादा हो गया है ।Paytm ने अपने कस्टमर को एक तोहफा दिया है । अब आप बिना internet के भी पैसे ट्रान्सफर कर सकते है ।
अब हम जानते है की paytm से बिना internet के payment कैसे करे

1.जो मोबाईल नंबर paytm पर registered है उस नंबर से paytm की tool free service 1800 1800 1234 पर काल करे।
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aadhar card नंबर से कैसे निकाले पैमेंट ?

कैसे निकाले aadhar card number से पेमेंट


सरकार रोज नए नए तरीको से cashless को बढ़ावा दे रही है ।सबसे आसान तरीका है aadhar card number से पेमेंट निकलना इसके लिए आपको ATM कार्ड की भी जरुरत नही।जाने कैसे निकले aadhar number से पेमेंट:

harbal shampu बनाने की विधि हिंदी में


hello friends
आज हम आपको  बताएंगे की  harble shampu कैसे बनाये ।
aj har ghar me shampu ka upyog hota hai .jo ki chemicals ke bane hote hai .jiska asar ye hua ki aj bohot kam umra me bhi bal safed ho rhe hai .apne pariwar ko chemical se bane shampu se aajadi de or apne harbal shampu.

harbal shampu banane ki सामग्री :
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शुक्रवार, 9 दिसंबर 2016

how to earn mony ? whatsapp or facebook से पैसे कैसे कमाये जाने

नमस्कार दोस्तों 

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आज के आधुनिक दौर में एंड्रॉइड मोबाईल का उपयोग ज्यादातर लोग करते है ।आज आपको बताएंगे की अपने मोबाईल का उपयोग कर पैसे कैसे कमाए और फ्री में 1000 का daily recharg कैसे करे ।इस app से आप फ्री बिल भुगतान भी कर सकते है
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विशेषताए ~≧◇≦इस app को डाऊनलोड करने के 2 से                                 5 मिनिट में पैसे आ जाते है ।Referlink 50 रुपये का बॅलेन्स मिलता है वो भी 5 मिनिट में।50 से लेकर 2500 तक रोज बैंक में ट्रांफर कर सकते है


अब प्ले स्टोर खुलेगा जिसमे Freeb app दिखेगी 
उसे install करे

install होने के बाद open करे और मोबाईल नंबर डाले और next पर क्लिक करे ।फिर आपके पास sms आएगा 4 अंक का verify करे ।

दो तरह से पैसे कमाए जा सकते है freeb द्वारा

एप्लीकेशन install करके  10000 तक कमा सकते है और 
दूसरा referlink से 50 रूपये काम सकते है ।
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           2.app को डाऊनलोड करने के बाद रजिस्टर जरूर करे मतलब account बना ले
3. refer करने से पहले कोई 2 app डाऊनलोड कर install जरूर कर ले ।



         धन्यवाद
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बुधवार, 7 दिसंबर 2016

small scal business idea in hindi लघु उद्योग अगरबत्ती बनाने की सरल विधि जाने

 small scall udhyog in hindi
नमस्कार दोस्तों
आज हम आपको अगरबत्ती उद्योग  के बारे में बताऐगे जो बहोत हि कम पूंजी में स्टार्ट कर सकते है साथ ही इसमें लिए आपको पड़ा लिखा होने की भी जरुरत नही ।
अगरबत्ती  बनाना~:

अगरबत्ती का स्वरोजगार आजकल खूब फल-फूल रहा है। यह वह उद्योग है, जिसको अधिकतर महिलाएं चलाती हैं। ऐसी महिलाओं की संख्या सबसे ज्यादा है, जो शादी के बाद अगरबत्ती का व्यवसाय घर से शुरू कर रही हैं। अगरबत्ती की जरूरत हर घर में होती है। घर को सुगंधित करना हो या फिर भगवान की पूज करने के लिए अगरबत्ती की आवश्यकता पड़ती है। घर बैठी महिलाओं के लिए यह स्वरोजगार अब 
कमाई का उम्दा जरिया बन चुका है, क्योंकि अगरबत्ती का जो पैकेट चार साल पहले तक महज 1 से 5 रु. के बीच दुकानों से उपलब्ध होता था, वह अब 20 से 


25 रु. का मुहैया हो रहा है। यही नहीं, इन पैकेटों की कई वराइटी होती हैं, जिनकी कीमत सौ रुपये तक भी होती है ।




अगरबत्ती बनाने की विधि

अगरबत्ती के निर्माण की प्रक्रिया अत्यन्त आसान है तथा घर में ही कम पूंजी तथा बिना किसी मशीन के प्रयोग से यह इकाई स्थापित की जा सकती है। इसकी निर्माण की प्रक्रिया भी ऐसी है कि इसके निर्माण में घर के सभी सदस्य हाथ बंटा सकते हैं। इस प्रकार घरेलू स्तर पर ही अत्यन्त अल्प पूंजी से स्थापित करके यह उद्योग अनेकों शिक्षित बेरोजगार युवकों तक के लिए जीविकोपार्जन का साधन बन सकता है।
इसे बनाने में जो प्रमुख 
कच्चे माल काम में आते हैं वे हैं - लकडी, सफेद चंदन, लकडी का कोयला 
(चारकोल), राल तथा गूगल आदि। इनमें सर्वप्रथम सफेद चंदन तथा लकडी के 
कोयले को अच्छी तरह पीस लिया जाता है। इसके उपरांत गूगल को पानी में 
मिलाकर खरल करके उसकी लेई बना ली जाती है। इसके उपरांत इसमें पीसा हुआ 
चंदन सफेद, राल तथा लकडी का कोयला (चार कोल) मिला दिया जाता है। इस 
प्रकार यह मसाला तैयार हो जाता है। 

इस गूंथे हुए मसाले को बांस की तालियों (सीकों) पर लगाया जाता है। 
तीलियों पर मसाला लगाने के अनेकों तरीके प्रचलन में हैं। एक तरीके के 
अनुसार एक हाथ में हथेली पर मसाला लेकर उस पर तीली घुमाते हुए मसाला तीली 
पर चढा दिया जाता है। इसी प्रकार एक दूसरे तरीके में मसाले में से जरा सी 
गोली को बेलते हुए सींक पर मसाला चढा लिया जाता है। अच्छी सुगंधित 
अगरबत्ती बनाने के लिए मसाले में 1/8 भाग चंदन का बुरादा मिला लेना 
उपयुक्त रहता है। 

बांस की तीलियां बाजार में आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं। इन तीलियों का 
साइज प्रायः 8 इंच से 10-12 इंच तक होता है। प्रायः एक किलो में लगभग 
1300 तीलियां (मसाला लगाने के बाद) आती हैं। इस प्रकार इन तीलियों पर लगा 
मसाला सूख जाने के उपरांत इन्हें सुगंधित अगरबत्तियां बनाने के लिए मसाला 
लगाने के उपरांत या तो इन अगरबत्तियों को एक सुगंधित मिश्रण में डुबोया 
जाता है अथवा उस पर वह मिश्रण छिडक दिया जाता है। इस संदर्भ में एक अच्छे 
सुगंधित मिश्रण का फार्मूला इस प्रकार है ! 

1. बेंजिन एसिटेट - 25 ग्राम 

2. चंदन का तेल - 30 ग्राम 

3. बेंजिन अल्कोहल - 5 ग्राम 

4. लिनासूस - 10 ग्राम 

5. लिनालिल एसिटेट - 5 ग्राम 
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6. अल्का एमाइल एल्डिहाइड- 2 ग्राम का अल्कोहल में 10 फीसदी घोल 

7. इंडोल 10 फीसदी घोल - 5 ग्राम


इस प्रकार उद्यमी सुगंध के संदर्भ में अपनी पसंद का कोई और फार्मूला अथवा 
किसी और प्रकार की सुगंध का इस्तेमाल भी कर सकता है। साधारणतया 
अगरबत्तियों की पैकिंग 10-10 तीलियों की संख्या में चौकोर कार्डबोर्ड के 
डिब्बों में की जाती है। डिब्बों में पैक करने से पूर्व इन पर प्रायः 
सैलोफीन कागज अथवा पोलीथीन भी चिपकाया जाता है। आजकल अगरबत्तियों की 
पैकिंग हेतु प्लास्टिक के गोल तथा लम्बे डिब्बों का उपयोग भी किया जा रहा 
है। 

दूसरों को भी रोजगार दे सकती हैं 

अगरबत्ती का रोजगार सबसे पहले आप अपने घर के सदस्यों के साथ मिल कर शुरू 
कर सकती हैं। अगर एक आदमी के पास इसकी जनकारी है तो वह दूसरों से शेयर 
करके काम को आगे बढ़ा सकते हैं। अगर आपको लगता है कि काम बड़े स्तर पर 
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शुरू करना है तो आप मुहल्ले की औरतों का एक समूह बना लें और उनको काम की 
कुछ जनकारी दे दें और अपना काम शुरू कर दें। ऐसा करने से आप तो कमाएंगी 
ही दूसरों को रोजगार भी दे सकेंगी। 

अगरबत्ती बनाने की मशीनरी !


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small scal business ko badawa dekar bharat ki pragati me hath bataye


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मंगलवार, 6 दिसंबर 2016

जैविक खेती की जानकारी !! ORGENIC FARMING BENEFITS !! INDIAN AGRICULTURE

जैविक खेती
संपूर्ण विश्व में बढ़ती हुई जनसंख्या एक गंभीर समस्या है, बढ़ती हुई जनसंख्या के साथ भोजन की आपूर्ति के लिए मानव द्वारा खाद्य उत्पादन की होड़ में अधिक से अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए तरह-तरह की रासायनिक खादों, जहरीले कीटनाशकों का उपयोग, प्रकृति के जैविक और अजैविक पदार्थो के बीच आदान-प्रदान के चक्र को (इकालाजी सिस्टम) प्रभावित करता है, जिससे भूमि की उर्वरा शक्ति खराब हो जाती है, साथ ही वातावरण प्रदूषित होता है तथा मनुष्य के स्वास्थ्य में गिरावट आती है।
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प्राचीन काल में मानव स्वास्थ्य के अनुकुल तथा प्राकृतिक वातावरण के अनुरूप खेती की जाती थी, जिससे जैविक और अजैविक पदार्थो के बीच आदान-प्रदान का चक्र Ecological system निरन्तर चलता रहा था, जिसके फलस्वरूप जल, भूमि, वायु तथा वातावरण प्रदूषित नहीं होता था। भारत वर्ष में प्राचीन काल से कृषि के साथ-साथ गौ पालन किया जाता था, जिसके प्रमाण हमारे ग्रांथों में प्रभु कृष्ण और बलराम हैं जिन्हें हम गोपाल एवं हलधर के नाम से संबोधित करते हैं अर्थात कृषि एवं गोपालन संयुक्त रूप से अत्याधिक लाभदायी था, जोकि प्राणी मात्र व वातावरण के लिए अत्यन्त उपयोगी था। परन्तु बदलते परिवेश में गोपालन धीरे-धीरे कम हो गया तथा कृषि में तरह-तरह की रसायनिक खादों व कीटनाशकों का प्रयोग हो रहा है जिसके फलस्वरूप जैविक और अजैविक पदार्थो के चक्र का संतुलन बिगड़ता जा रहा है, और वातावरण प्रदूषित होकर, मानव जाति के स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है। अब हम रसायनिक खादों, जहरीले कीटनाशकों के उपयोग के स्थान पर, जैविक खादों एवं दवाईयों का उपयोग कर, अधिक से अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं जिससे भूमि, जल एवं वातावरण शुध्द रहेगा और मनुष्य एवं प्रत्येक जीवधारी स्वस्थ रहेंगे।
भारत वर्ष में ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार कृषि है और कृषकों की मुख्य आय का साधन खेती है। हरित क्रांति के समय से बढ़ती हुई जनसंख्या को देखते हुए एवं आय की दृष्टि से उत्पादन बढ़ाना आवश्यक है अधिक उत्पादन के लिये खेती में अधिक मात्रा में रासायनिक उर्वरको एवं कीटनाशक का उपयोग करना पड़ता है जिससे सीमान्य व छोटे कृषक के पास कम जोत मेें अत्यधिक लागत लग रही है और जल, भूमि, वायु और वातावरण भी प्रदूषित हो रहा है साथ ही खाद्य पदार्थ भी जहरीले हो रहे हैे। इसलिए इस प्रकार की उपरोक्त सभी समस्याओं से निपटने के लिये गत वर्षो से निरन्तर टिकाऊ खेती के सिध्दान्त पर खेती करने की सिफारिश की गई, जिसे प्रदेश के कृषि विभाग ने इस विशेष प्रकार की खेती को अपनाने के लिए, बढ़ावा दिया जिसे हम ''जैविक खेती'' के नाम से जानते हेै। भारत सरकार भी इस खेती को अपनाने के लिए प्रचार-प्रसार कर रही है।
म.प्र. में सर्वप्रथम 2001-02 मेंं जैविक खेती का अन्दोलन चलाकर प्रत्येक जिले के प्रत्येक विकास खण्ड के एक गांव मे जैविक खेती प्रारम्भ कि गई और इन गांवों को ''जैविक गांव'' का नाम दिया गया । इस प्रकार प्रथम वर्ष में कुल 313 ग्रामों में जैविक खेती की शुरूआत हुई। इसके बाद 2002-03 में द्वितीय वर्ष मे प्रत्येक जिले के प्रत्येक विकासखण्ड के दो-दो गांव, वर्ष 2003-04 में 2-2 गांव अर्थात 1565 ग्रामों मे जैविक खेती की गई। वर्ष 2006-07 में पुन: प्रत्येक विकासखण्ड में 5-5 गांव चयन किये गये। इस प्रकार प्रदेश के 3130 ग्रामों जैविक खेती का कार्यक्रम लिया जा रहा है। मई 2002 में राष्ट्रीय स्तर का कृषि विभाग के तत्वाधान में भोपाल में जैविक खेती पर सेमीनार आयोजित किया गया जिसमें राष्ट्रीय विशेषज्ञों एवं जैविक खेती करने वाले अनुभवी कृषकों द्वारा भाग लिया गया जिसमें जैविक खेती अपनाने हेतु प्रोत्साहित किया गया। प्रदेश के प्रत्येक जिले में जैविक खेती के प्रचार-प्रसार हेतु चलित झांकी, पोस्टर्स, बेनर्स, साहित्य, एकल नाटक, कठपुतली प्रदर्शन जैविक हाट एवं विशेषज्ञों द्वारा जैविक खेती पर उद्बोधन आदि के माध्यम से प्रचार-प्रसार किया जाकर कृषकों में जन जाग्रति फैलाई जा रही है। *
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शनिवार, 3 दिसंबर 2016

10 हजार से काम पूंजी में शुरू होने वाले bussines के बारे में जाने

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नमस्कार दोस्तों 
  आज हम आपको एक ऐसे उद्योग के बारे में बताएंगे जो 10000 से कम में स्टार्ट कर सकते है और 30000 या उससे अधिक हर महीना काम सकते है ।
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जी हा दोस्तों 

शुक्रवार, 2 दिसंबर 2016

नहाने का हर्बल सोप( साबुन) घर पर बानाने की आसन विधि जाने

नमस्कार दोस्तों 
        
       आज हम आपको दैनिक जीवन में रोज उपयोग होने वाली वस्तु साबुन  वो भी हर्बल की आसान विधी बताएंगे 
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जिससे आप आसानी से हर्बल साबुन सस्ते में आसानी से तैयार कर सकेंगे और कई प्रकार के त्वचा सम्बंधित रोगों से अपने और अपने परिवार की रक्षा कर सकेंगे ।

सामग्री~:

शुक्रवार, 18 नवंबर 2016

Download "Earn TalkTime" and get free recharge Free Recharge प्राप्त करने का आसान और सर्वश्रेष्ठ मुफ्त एंड्रॉयड App है - Earn TalkTime .

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Earn TalkTime 


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Free Recharge  प्राप्त करने  का यह आसान और सर्वश्रेष्ठ मुफ्त एंड्रॉयड App है - Earn TalkTime . इसे  डाउनलोड करके आप आसानी से फ्री रिचार्ज प्राप्त कर सकते हैं और  अब आप EarnTalktime से मुफ्त एसएमएस भेज सकते हैं। इसके अलावा कुंडली, टैरो, बॉलीवुड गपशप पढ़ने के लिए कमाते हैं, अपने मोबाइल से सर्वेक्षण आदि भरने कमाने का टॉकटाइम आप असीमित मोबाइल प्रीपेड रिचार्ज, डीटीएच टॉप-अप, पोस्टपेड बिल भुगतान आदि सुविधाएँ देने वाली पहली app है।

Free Recharge कैसे प्राप्त करें ?

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4. प्राप्त फ्री बैलेंस के द्वारा आप  मोबाइल प्रीपेड रिचार्ज, डीटीएच रिचार्ज, मोबाइल पोस्टपेड बिल भुगतान और फ्लिपकार्ट उपहार वाउचर आदि में प्रयोग कर सकते हैं ।  प्रीपेड मोबाइल ऑपरेटरों: एयरटेल, वोडाफोन, रिलायंस, आइडिया, एयरसेल, बीएसएनएल, एमटीएनएल, टाटा डोकोमो, यूनिनॉर, एमटीएस, वीडियोकॉन, लूप पर आप रिचार्ज कर सकते हैं ।



शनिवार, 18 जून 2016

crop tips in hindi .humic acid क्या है ।Quality की जाँच कैसे करे साथ में humic acip के crop बेनिफिट जाने

दोस्तों आज का हमारा विषय है           PGR. ( plant growth reguletores )  मतलब पौध वृध्दि करक  बोहोत सरे PGR बाजार में उपलब्ध है। सभी के बारे में आने वाले लेखो में हम बताएँगे।
what is humic acid
 अभी हम बात करेंगे
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सोमवार, 23 मई 2016

मूंगफली की आधुनिक खेती

 नमस्कार आज हम आपको मूंगफली की फसल की जानकारी के साथ साथ अधिक से अधिक उत्पादन कैसे प्राप्त करे ।
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मूंगफली :~
मूंगफल में तेल 45 से 55 प्रतिशत, प्रोटीन 28 से 30 प्रतिशत कार्बोहाइड्रेठ 21-25 प्रतिशत, विटामिन बी समूह, विटामिन-सी, कैल्शियम, मैग्नेशियम, जिंक फॉस्फोरस, पोटाश जैसे मानव शरीर को स्वस्थ रखनें वाले खनिज तत्व प्रचुर मात्रा में पाये जाते है।
उन्नत

शनिवार, 21 मई 2016

kesar की खेती से कैसे लाभ कमाए !! earn money for sefaron crop!!kheti ki aadhunik taknik!!

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नमस्कार दोस्तों आज हमको बताएंगे की केसर की खेती कैसे और कहा की जा सकती है और इसमें अधिक से अधिक प्रॉफिट कैसे कमाया जा सकता है 
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केसर (क्रोकस साटिवस) को ठंडा ,सूखा और धूप जलवायु पसंद है और समुद्र स्तर से ऊपर 1500 से लेकर 2500 मीटर ऊंचाई में बढ़ता है. ठंडा और गीला मौसम फूल आना रोकता है लेकिन माँ corms की बेटी corms की एक बड़ी संख्या में उत्पादन करने की योग्यता बढ़ जाता है. इसकी खेती औसत वर्षा 100 सेमी के क्षेत्रों में और जहां सर्दियों के
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दौरान कुछ बर्फ गिरता है वहाँ की जाती है.
भूमि
केसर का विकास मिट्टी के विभिन्न प्रकार रेतीले चिकनी बलुई मिट्टी से लेकर दोमट मिट्टी में कर सकते हैं. हालांकि, corms की सड़ से बचने के लिए उचित जल निकासी की जरूरत है .
भूमि की तैयारी
एक अच्छा बिस्तर की तैयारी के लिए तीन से चार बार जुताई पर्याप्त हैं. अच्छा बीज बिस्तर प्राप्त करने के लिए कृषि यार्ड खाद और अन्य कार्बनिक पदार्थों को अंतिम जुताई से पहले मिट्टी में ठीक से मिलाया जाना चाहिए. छोटे संचालनीय (2mx1mx15cm) उठाया बेड अच्छे परिणाम दे सकते हैं .बेड को सभी चार पक्षों पर किसी भी अधिक नमी का निकास करने के लिए चैनल होना चाहिए.


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रोपण का समय
रोपण के लिए जुलाई से लेकर अगस्त के पहले हफ्ते तक इष्टतम समय है. मध्य जुलाई रोपण के लिए सबसे अच्छा समय है.
प्रसारण
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केसर corms के माध्यम से प्रसारित किया जाता है. पौधा बारहमासी है और केवल बड़े आकार के साथ 2.5 सेमी व्यास के ऊपर के corms रोपण के लिए इस्तेमाल किये जा सकते हैं.
खाद डालना
अंतिम जुताई से पहले 20 टन गोबर की खाद प्रति हेक्टेयर मिट्टी में डालना चाहिए. 90 किलोग्राम नाइट्रोजन और 60 किलो प्रत्येकी फास्फोरस और पोटाश प्रति हेक्टेयर डालना चाहिए.
रोपण की विधि
Corms 6-7 सेमी गहरी लगाया जाना चाहिए और 10 सेमी x 10 सेमी की दूरी को अपनाना चाहिए.
बीज दर
dibbling के लिए पंद्रह क्विंटल के corms प्रति हेक्टेयर
अंतर संस्कृति और निराई
जंगली घास नियंत्रित करने के लिए दो से तीन कुदाल और निराई करना चाहिए.
केसर को पूरे दिन सूर्य की आवश्यकता नहीं है, लेकिन एक दिन में कम से कम सात घंटे चाहिए.जब वे अपने विकास के चरण में हैं उस वक़्त हर दूसरे दिन उन्हें हल्के से पानी देना चाहिए. उथले खेती की जरूरत है.
शरद ऋतु में ,जब पत्ते विकास उभरता हैं तो पौधों को कड़ा बंद करता है तो फिर उन्हें बाहर अधिमानतः एक जगह न केवल धूप में लेकिन कुछ आश्रय में सेट करना चाहिए. वे ठंड बहुत कुछ बर्दाश्त कर सकते हैं, तो सख्त बंद का एक लंबे समय तक आवश्यकता नहीं है. वसंत में, जब पत्ते वापस मरना शुरू होते हैं, तो अप्रैल में पानी देना रोकते हैं और ग्रीष्म ऋतु में पौधों को घर के अंदर ले आते हैं.
शरद ऋतु में, वनस्पति की निद्रा टूट जाएगा और नई पत्तियों का आना शुरू हो जाएगा. जब पहली बार नई पत्तियों का उभरना शुरू हो जाता हैं पौधों को पानी देना चाहिए और उन्हें वापस बाहर स्थानांतरित करना चाहिए.
बढ़ती केसर के सफलता का रहस्य है - कटाई . आप को वर्ष के सही समय पर पौधों पर दैनिक ध्यान रखना चाहिए और फसल तैयार है तो संतोषजनक परिणाम प्राप्त करने के लिए उस दिन ही आप को इसकी कटाई करना चाहिए.
प्रत्येक फूल तीन स्टिग्मास्(फ़िलमेन्ट्स् या धागे) जो फूल की गले से लटकते दिखाई देते हैं पैदा करता है अगर स्टिग्मास् जो दिन फूल खुलता है उस दिन ही नहीं तो अधिक से अधिक अगली सुबह तक चुनी नहीं हैं, तो वे खराब होना शुरू हो जाते हैं.आमतौर पर, नए पत्ते सितम्बर पूर्व में आते हैं और अक्टूबर पूर्व से मध्य अक्टूबर तक फूल आते हैं.

बुधवार, 18 मई 2016

हिन्दू मान्यताओ (जिन्हें लोग अंधविश्वास कहते है) के वैज्ञानिक आधार

हिंदू परम्पराओं से जुड़े ये वैज्ञानिक तर्क:

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1- कान छिदवाने की परम्परा:
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भारत में लगभग सभी धर्मों में कान छिदवाने की परम्परा है।
वैज्ञानिक तर्क-
दर्शनशास्त्री मानते हैं कि इससे सोचने की शक्त‍ि बढ़ती है। जबकि डॉक्टरों का मानना है

मंगलवार, 17 मई 2016

HEALTH TIPS दही का सेवन कैसे और कब करे जाने

नमस्कार दोस्तों 
आप सभी दही का सेवन करते है पर इसकी उप्योगिया और लाभ बहोत काम लोग जानते है हम आपको बताएंगे की दही के सेवन का सही तरीका
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रविवार, 15 मई 2016

HEALTH TIPS करेले का JUICE कैसे होता है स्वास्थ्य के लिए लाभकारी जाने

कृषि दर्पण में आपका स्वागत है आज हम आपको बताएंगे
                 
       करेले के गुण
मनुष्य के लिए करेला परम हितकारी और औषधीय गुणों का भंडार है। भूख को बढ़ाकर करेला हमारी पाचन शक्ति को सुधारता है। पचने में करेला
हल्का होता है। गर्मी से उत्पन्न विकारों पर शीतल होने के कारण यह शीघ्र लाभ करता है| करेला बेशक खाने में कड़वा हो, लेकिन इसके गुण बेहद मीठे हैं| करेला एक ऐसी सब्जी है, जो काफी सारी बीमारियों को दूर रखने में कारगर साबित होती है| आज हम आपको करेले के फायदों के बारे में बताने वाले हैं|
मधुमेह रोगियों के लिए उपयोगी
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करेला मधुमेह में रामबाण
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बुधवार, 4 मई 2016

लू लगना क्या होता है और इससे कैसे बचे जाने

उष्माघात ... लू लगना
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 लू लगने से मृत्यु क्यों होती है? उष्माघात ... लू लगना

 लू लगने से मृत्यु क्यों होती है?
दिल्ली से आंध्रप्रदेश तक....
 सैकड़ो लोग लू लगने से मर रहे है।

हम सभी धूप में घूमते है फिर कुछ लोगो की ही धूप में  जाने के कारण अचानक मृत्यु क्यों होती है?

👉 हमारे शरीर का तापमान हमेशा 37° डिग्री सेल्सियस होता है,इस तापमान पर ही हमारे शरीर के सभी अंग सही

शुक्रवार, 25 मार्च 2016

फ्री में फोन रीचार्ज करने के आसान तरीका Free Mobile Recharge Trick

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ये रहा फ्री में फोन रीचार्ज करने के आसान तरीका Free Mobile Recharge Trick
हम एंड्राइड मोबाइल में  कई प्रकार के apps डाउनलोड करते है  आपको apps डाउनलोड करने पर फ्री बैलेंस भी मिल सकता है । ऐसा ही एक app है  mCent app जो ऑफर के अंतर्गत फ्री बेलेंस देता है ।

एक ऐसा bussines जो 10000 से काम पूंजी में स्टार्ट करे और 30000 से अधिक कमा सकते है क्या है ये बिजनेस जानने के लिए यह क्लिक करे

बुधवार, 23 मार्च 2016

गौमूत्र के 25 रोचक गुण- जो आप नहीं जानते


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गाय के गोबर में लक्ष्मी और मूत्र में गंगा का वास होता है, जबकि आयुर्वेद में गौमूत्र के ढेरों प्रयोग कहे गए हैं। गौमूत्र का रासायनिक विश्लेषण करने पर वैज्ञानिकों ने पाया, कि इसमें 24 ऐसे तत्व हैं जो शरीर के विभिन्न रोगों को ठीक करने की क्षमता रखते हैं। आयुर्वेद के अनुसार गौमूत्र का नियमित सेवन करने से कई बीमारियों को खत्म किया जा सकता है। जो लोग नियमित रूप से थोड़े से गौमूत्र का भी सेवन करते हैं, उनकी रोगप्रतिरोधी क्षमता बढ़ जाती है। मौसम परिवर्तन के समय होने वाली कई बीमारियां दूर ही रहती हैं। शरीर स्वस्थ और ऊर्जावान बना रहता है। इसके कुछ गुण इस प्रकार गए हैं :-

1. गौ मूत्र कड़क, कसैला, तीक्ष्ण और ऊष्ण होने के साथ-साथ विष नाशक, जीवाणु नाशक, त्रिदोष नाशक, मेधा शक्ति वर्द्धक और शीघ्र पचने वाला होता है। इसमें नाइट्रोजन, ताम्र, फास्फेट, यूरिया, यूरिक एसिड, पोटाशियम, सल्फेट, फास्फेट, क्लोराइड और सोडियम की विभिन्न मात्राएं पायी जाती हैं। यह शरीर में ताम्र की कमी को पूरा करने में भी सहायक है।

2. गौमूत्र को न केवल रक्त के सभी तरह के विकारों को दूर करने वाला, कफ, वात व पित्त संबंधी तीनो दोषों का नाशक, हृदय रोगों व विष प्रभाव को खत्म करने वाला, बल-बुद्धि देने वाला बताया गया है, बल्कि यह आयु भी बढ़ाता है।

3. पेट की बीमारियों के लिए गौमूत्र रामवाण की तरह काम करता है, इसे चिकित्सीय सलाह के अनुसार नियमित पीने से यकृत यानि लिवर के बढ़ने की स्थिति में लाभ मिलता है। यह लिवर को सही कर खून को साफ करता है और रोग से लड़ने की क्षमता विकसित करता है।

4. 20 मिली गौमूत्र प्रात: सायं पीने से निम्न रोगों में लाभ होता है।

1. भूख की कमी, 2. अजीर्ण, 3. हर्निया, 4. मिर्गी, 5. चक्कर आना, 6. बवासीर, 7. प्रमेह, 8.मधुमेह, 9.कब्ज, 10. उदररोग, 11. गैस, 12. लूलगना, 13.पीलिया, 14. खुजली, 15.मुखरोग, 16.ब्लडप्रेशर, 17.कुष्ठ रोग, 18. जांडिस, 19. भगन्दर, 20. दन्तरोग, 21. नेत्र रोग, 22. धातु क्षीणता, 23. जुकाम, 24. बुखार, 25. त्वचा रोग, 26. घाव, 27. सिरदर्द, 28. दमा, 29. स्त्रीरोग, 30. स्तनरोग, 31.छिहीरिया, 32. अनिद्रा।

5. गौमूत्र को मेध्या और हृदया कहा गया है। इस तरह से यह दिमाग और हृदय को शक्ति प्रदान करता है। यह मानसिक कारणों से होने वाले आघात से हृदय की रक्षा करता है और इन अंगों को प्रभावित करने वाले रोगों से बचाता है।

6. इसमें कैसर को रोकने वाली ‘करक्यूमिन‘ पायी जाती है |

7. कैंसर की चिकित्सा में रेडियो एक्टिव एलिमेन्ट प्रयोग में लाए जाते है | गौमूत्र में विद्यमान सोडियम,पोटेशियम,मैग्नेशियम,फास्फोरस,सल्फर आदि में से कुछ लवण विघटित होकर रेडियो एलिमेन्ट की तरह कार्य करने लगते है और कैंसर की अनियन्त्रित वृद्धि पर तुरन्त नियंत्रण करते है | कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करते है | अर्क आँपरेशन के बाद बची कैंसर कोशिकाओं को भी नष्ट करता है | यानी गौमूत्र में कैसर बीमारी को दूर करने की शक्ति समाहित है |

8. दूध देने वाली गाय के मूत्र में “लेक्टोज” की मात्रा आधिक पाई जाती है, जो हृदय और मस्तिष्क के विकारों के लिए उपयोगी होता है।

9. गाय के मूत्र में आयुर्वेद का खजाना है! इसके अन्दर ‘कार्बोलिक एसिड‘ होता है जो कीटाणु नासक है, यह किटाणु जनित रोगों का भी नाश करता है। गौमूत्र चाहे जितने दिनों तक रखे, ख़राब नहीं होता है।

10. जोड़ों के दर्द में दर्द वाले स्थान पर गौमूत्र से सेकाई करने से आराम मिलता है। सर्दियों के मौषम में इस परेशानी में सोंठ के साथ गौ मूत्र पीना फायदेमंद बताया गया है।

11. गैस की शिकायत में प्रातःकाल आधे कप पानी में गौ मूत्र के साथ नमक और नींबू का रस मिलाकर पीना चाहिए।

12. चर्म रोग में गौ मूत्र और पीसे हुए जीरे के लेप से लाभ मिलता है। खाज, खुजली में गौ मूत्र उपयोगी है।
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13. गौमूत्र मोटापा कम करने में भी सहायक है। एक ग्लास ताजे पानी में चार बूंद गौ मूत्र के साथ दो चम्मच शहद और एक चम्मच नींबू का रस मिलाकर नियमित पीने से लाभ मिलता है।

14. गौमूत्र का सेवन छानकर किया जाना चाहिए। यह वैसा रसायन है, जो वृद्धावस्था को रोकता है और शरीर को स्वस्थ्यकर बनाए रखता है।

15.गौमूत्र किसी भी प्रकृतिक औषधी के साथ मिलकर उसके गुण-धर्म को बीस गुणा बढ़ा देता है| गौमूत्र का कई खाद्य पदार्थों के साथ अच्छा संबंध है जैसे गौमूत्र के साथ गुड़, गौमूत्र शहद के साथ आदि|

16.अमेरिका में हुए एक अनुसंधान से सिध्द हो गया है कि गौ के पेट में "विटामिन बी" सदा ही रहता है। यह सतोगुणी रस है व विचारों में सात्विकता लाता है।

17.गौमूत्र लेने का श्रेष्ठ समय प्रातःकाल का होता है और इसे पेट साफ करने के बाद खाली पेट लेना चाहिए| गौमूत्र सेवन के 1 घंटे पश्चात ही भोजन करना चाहिए|

18. गौमूत्र देशी गाय का ही सेवन करना सही रहता है। गाय का गर्भवती या रोग ग्रस्त नहीं होना चाहिए। एक वर्ष से बड़ी बछिया का गौ मूत्र बहुत लाभकारी होता है।

19. मांसाहारी व्यक्ति को गौमूत्र नहीं लेना चाहिए| गौमूत्र लेने के 15 दिन पहले मांसाहार का त्याग कर देना चाहिए| पित्त प्रकृति वाले व्यक्ति को सीधे गौमूत्र नहीं लेना चाहिए, गौमूत्र को पानी में मिलाकर लेना चाहिए| पीलिया के रोगी को गौमूत्र नहीं लेना चाहिए| देर रात्रि में गौमूत्र नहीं लेना चाहिए| ग्रीष्म ऋतु में गौमूत्र कम मात्र में लेना चाहिए|

20. घर में गौमूत्र छिड़कने से लक्ष्मी कृपा मिलती है, जिस घर में प्रतिदिन गौमूत्र का छिड़काव किया जाता है, वहां देवी लक्ष्मी की विशेष कृपा बरसती है।

21.गौमूत्र में गंगा मईया वास करती हैं। गंगा को सभी पापों का हरण करने वाली माना गया है, अत: गौमूत्र पीने से पापों का नाश होता है।

22.जिस घर में नियमित रूप से गौमूत्र का छिड़काव होता है, वहां बहुत सारे वास्तु दोषों का समाधान एक साथ हो जाता हैं।

23. देसी गाय के गोबर-मूत्र-मिश्रण से ‘`प्रोपिलीन ऑक्साइड” उत्पन्न होती है, जो बारिस लाने में सहायक होती है| इसी के मिश्रण से ‘इथिलीन ऑक्साइड‘ गैस निकलती है जो ऑपरेशन थियटर में काम आता है |

24. गोमुत्र कीटनाशक के रूप में भी उपयोगी है। देसी गाय के एक लीटर गोमुत्र को आठ लीटर पानी में मिलाकर प्रयोग किया जाता है । गोमुत्र के माध्यम से फसल को नैसर्गिक युरिया मिलता है। इस कारण खाद के रूप में भी यह छिड़काव उपयोगी होता है ।गौमूत्र से औषधियाँ एपं कीट नियंत्रक बनाया जा सकता है।

25. अमेरिका ने गौ मूत्र पर 6 पेटेंट ले लिए हैं, और अमेरिकी सरकार हर साल भारत से गाय का मूत्र आयात करती है और उससे कैंसर की दवा बनाती हैं । उसको इसका महत्व समझ आने लगा है। जबकि हमारे शास्त्रो मे करोड़ो वर्षो पहले से इसका महत्व बताया गया है।।
जय गौ माता -जय गोपाल

फेसबुक सुरक्षा उपाय - 4 अपने फेसबुक अकाउंट की प्राइवेसी सेटिंग का प्रयोग कर धोखाधड़ी से बचिए ।
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शनिवार, 12 मार्च 2016

एलोविरा आयुर्वेद का खजाना ( जाने गुण और उपयोग)

एलोवेरा (धृत कुमारी) के औषधीय गुण
एलोवेरा ( ग्वार पाठा ) का नाम आजकल बहुत चर्चित है . एलोवेरा को हम बहुत से नामो से जानते है - ग्वारपाठा , चित्र कुमारी , धृत कुमारी आदि . बहुत से फायदों की वजह से एलोवेरा को चमत्कारी पौधा कहा जाता है . घृतकुमारी का पौधा बिना तने का या बहुत ही छोटे तने का एक गूदेदार और रसीला पौधा होता है . ग्रामीण लोग इसके चमत्कारों से वाकिफ होने के चलते इसका आसानी से बहुत से रोगों में प्रयोग करते है . शहरों के अनियमित दिनचर्या जीने वालों के लिए एलोवेरा का रस किसी अमृत से कम नहीं |
दुनिया में २०० से अधिक प्रकार की किस्मो का एलोवेरा पाया जाता है . इसमें एलो बाबिड़ेंसिस को मनुष्य के स्वास्थ्य के लिए सबसे ज्यादा लाभदायक मन जाता है . इसकी तासीर गर्म होती हैं इस पौधे का रस बुढ़ापा प्रतिरोधी तत्व है . इसके प्रयोग से इंसान लम्बे समय तक अंदरूनी और बाहरी तौर पर जवान बना रह सकता है . ग्वार पाठे का पौधा गरम और खुश्क जलवायु में पनपता है इसे ज्यादा खाद या सिंचाई की जरुरत नहीं होती .
रासायनिक घटक : इसके रस में १८ अमीनो एसिड , १२ विटामिन और २० खनिज पाए जाते है इसके अलावा कई अन्य अनजाने यौगिग तत्व भी इसमें पाए जाते है . पौधे का सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हिस्सा है , इसका रस जिसे बाजार में एलो जेल के नाम से जाना जाता है . एलोवेरा का रस इसके पत्तों से तब निकाला जाता है जब पत्ते तीन साल के हो जाते है . तभी उस रस में अधिकतम पोष्टिक तत्व , और औषधीय गुण मौजूद होते है . इसके पत्तो से रस निकाल कर या बाजार से खरीदकर पिया जा सकता है .
प्राकृतिक उत्पाद होने के कारण न तो इसका कोई साइड इफेक्ट होता है और न ही इसके प्रयोग से कोई व्यक्ति इसका आदि होता है बल्कि यह जैविक रूप से शरीर के लिए एकदम उपयुक्त होता है . इसके रस के सेवन से जहाँ बीमार व्यक्ति अपना स्वास्थ्य ठीक कर सकता है वहीँ स्वस्थ व्यक्ति इसके सेवन से अपने स्वास्थ्य को बनाए रखकर अधिक समय तक जवान बना रह सकता है |
किन बीमारियों में उपयोगी
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ह्रदय रोग और मोटापा कम करने कम ह्रदय रोग होने का मुख्य कारण मोटापा कोलेस्ट्रोल का बढ़ना और रक्तवाहिनियों में वसा का जमाव होना है | ऐसी स्थिति में इसका जूस बेहद फायदेमंद है | हमारे भोजन मेँ बहुत - सी गैर जरूरी चीँजे भी होती है , जिनकी बजह से हमेँ आलस्य तथा थकान होती है। एलोवेरा जूस रोजाना 20ml-30ml की मात्रा मेँ पीने से शरीर मेँ अन्दर से भरपूर तन्दुरूस्ती तथा ताजगी का अहसास होता है तथा ऊर्जा का उच्च स्तर बना रहता है और बजन शरीर के अनुकूल रहता है।
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आजकल ग्वारपाठा के उपयोग कर कई प्रकार के सौन्दर्य प्रसाधन व आयुर्वेदिक औषधियां बनाई जाती है . स्त्री अपने आप को स्वस्थ व सौन्दर्य को बनाए रखने के लिए घृतकुमारी के जूस का नित्य सेवन करें . जिससे शरीर में दुर्बलता , अपचन , चक्कर आना , पेट के विकार , हाथ - पाँव में जलन या झुनझुनाहट होना मानसिक रूप से अस्वस्थ आदि कई लक्ष्ण का पूर्ण निदान हो सकता है . अतः यह औषधि बहुमूल्य है , इसमें गुणों का भंडार है .
बालों के लिए : बालों के लिए भी इसके जूस को सिर में लगाने से बाल मुलायम , घने , काले होते है , एलोवेरा जैल या ज्यूस मेहंदी में मिलाकर लगाने से बालो का झड़ना बंद होता है , अगर बाल जड़ से भी जा चुके हो , तो इसका रस नियमित सिर पर लगाते रहने से नए उगने लगते है .
सर्दी खांसी में : अगर सर्दी या खांसी हो गयी हो तो ग्वारपाठा के पत्ते को भून कर उसका जूस निकाल लें और आधा चम्मच जूस एक कप गर्म पानी में मिला कर पी जाएँ , तुंरत लाभ मिलेगा । पेशाब संबन्धी रोगों को दूर करने के लिए एक सप्ताह तक रोज सुबह गूदे को खाएं।
फोड़ा व गाँठ में : ज़ख्म या घाव पर गुदे को क्रीम की तरह लगा सकते है , इसके पत्तों का गूदा करके जरा - सी पीसी हल्दी मिलकर पुल्टिस तैयार करें और गांठ , फोड़े पर रखकर पट्टी बांध दे | फोड़ा पक कर स्वतः फुट जायेगा और मवाद निकल जायेगा |
जलने पर : जले हुए स्थान पर तुरंत इसके गुदे का लेप कर देने से जलन शांत होती है और फफोले नहीं पड़ते है | शहद के साथ मिलकर जेल का प्रयोग करने से जले का निशान भी चला जाता है | जलने पर , अंग कहीं से कटने पर , अंदरूनी चोटों पर एलोवेरा अपने एंटी बैक्टेरिया और एंटी फंगल गुण के कारण घाव को जल्दी भरता है।
त्वचा सम्बन्धी रोगों में : त्वचा की खराबी , मुंहासे , रूखी त्वचा , धूप से झुलसी त्वचा , झुर्रियों , चेहरे के दाग - धब्बों , आंखों के काले घेरों , फटी एडियों के लिए यह लाभप्रद है। इसका गूदा या जैल निकालकर बालों की जड़ों में लगाना चाहिए। बाल काले , घने - लंबे एवं मजबूत होंगे।
कान दर्द में : कान दर्द में इसके गुदे का रस को आंच पर गर्म कर जो आराम से सहन कर सके जिस कान में दर्द हो उसकी दूसरी तरफ के कान में दो बूंद रस डालने से कान दर्द ठीक होता है |
बवासीर में : बवासीर रोगीं के लिए तो यह रामबाण औषधि है | इसकी सब्जी बनाकर खाने से लाभ होता है और इसका रस पिने से पेट ठीक रहेगा |
गठिया रोगों में : गठिया रोगों में इसके दो फांक कर इसमें हल्दी भरकर हल्का गर्म करें और प्रभावित भाग पर लगातार पट्टी करने से गठिया , जोड़ो में दर्द , मोच या सुजन में विशेष लाभ होता है | जोड़ो के दर्द में एलोवेरा जूस का सेवन सुबह - शाम खली पेट करें और प्रभावित जोड़ो पर लगाने से विशेष फायदा होता है |
कब्ज़ में : कब्ज़ में रोज एलोवेरा जूस का सेवन करने से बहुत ज्यादा फायदा होता है , छोटे बच्चों के कब्ज़ के लिए जूस व हींग मिलकर नाभि के चारों ओर लगा दे , इससे लाभ मिलेगा | यकृत की सुजन में इसके गुदे का सुबह - शाम सेवन से यकृत की कार्यक्षमता बढती है वो पीलिया रोग दूर होता है |

एलोविरा की खेती कैसे करे!! alovera forming benefits

औषधीय पौधा एलोवेरा फायदे की खेती
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घृतकुमारी जिसे ग्वारपाठा एवं एलोवेरा के नाम से भी जाना जाता है, प्राचीन समय से ही चिकित्सा जगत में बीमारियों को उपचारित करने के लिए इसका प्रयोग किया जा रहा है। घृतकुमारी के गुणों से हम सभी भली-भांति परिचित हैं। हम सभी ने सीधे या अप्रत्यक्ष रुप से इसका उपयोग किसी न किसी रुप में किया है। घृतकुमारी में अनेकों बीमारियों को उपचारित करने वाले गुण मौजूद होते हैं। इसीलिए ही आयुर्वेदिक उद्योग में घृतकुमारी की मांग बढ़ती जा रही है।
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एक बार लगाने पर तीन से पाँच साल तक उपज ली जा सकती है। और इसे खेत की मेड पर भी लगा सकते है जिसके कई फैदे है एक आप के खेत में कोई आवारा पशु नही आएगा | आपके खेत की मेडबंधी भी हो जाएगी एलोवेरा को कोई जानवर भी नही खाता है आप को अतिरिक्त आमदनी हो जाएगी |
मृदा एवं जलवायु:
प्राकृतिक रूप से इसके पौधे को अनउपजाऊ भूमि में उगते देखा गया है। इसे किसी भी भूमि में उगाया जा सकता है। परन्तु बलुई दोमट मिट्टी में इसका अधिक उत्पादन होता है।उन्नतशील प्रजातियाँ: केन्द्रीय औषधीय सगंध पौधा संस्थान के द्वारा सिम-सीतल, एल- 1,2,5 और 49 एवं को खेतों में परीक्षण के उपरान्त इन जातियों से अधिक मात्रा में जैल की प्राप्ति हुई है। इनका प्रयोग खेती (व्यवसायिक) के लिए किया जा सकता है।
पौध रोपाई:
भूमि की एक-दो जुताई के बाद खेत को पाटा लगाकर समतल बना लें। इसके उपरान्त ऊँची उठी हुई क्यारियों में 50&50 सेमी की दूरी पर पौधों को रोपित करें। पौधों की रोपाई के लिए मुख्य पौधों के बगल से निकलने वाले छोट छोटे पौधे जिसमें चार-पाँच पत्तियाँ हों, का प्रयोग करें। लाइन से लाइन की दूरी 50 एवं पौधे से पौधे की दूरी 50 रखने पर 45,000-50,000 पौधों की आवश्यकता रोपाई के लिए होगी। सिचिंत दशाओं में इसकी रोपाई फरवरी माह में उतम होती है वैसे आप कभी भी इसे लगा सकते हो |
खाद एवं उर्वरक:
10-12 टन प्रति हेक्टेयर गोबर की खाद पौधे के अच्छे विकास के लिए आवश्यक है। 120 किग्रा. यूरिया, 150 किग्रा. फास्फोरस एवं 33 किग्रा. पोटाश प्रति हेक्टेयर की दर से डालें। नाइट्रोजन को तीन बार में एवं फास्फोरस व पोटाश को भूमि की तैयारी के समय ही दें। नाइट्रोजन का पौधों पर छिड़काव करना अच्छा रहता है।
सिंचाई:
पौधों की रोपाई के बाद खेत में पानी दें। (घृतकुमारी) की खेती में ड्रिप एवं स्ंिप्रकलर सिंचाई अच्छी रहती है। प्रयोग द्वारा पता चला है कि समय से सिंचाई करने पर पत्तियों में जैल का उत्पादन एवं गुणवत्ता दोनों पर अच्छा प्रभाव पड़ता है। इस प्रकार वर्ष भर में 3-4 सिंचाईओं की आवश्यकता होती है।
रोग एवं कीट नियन्त्रण:
समय-समय पर खेत से खरपतवारों को निकालते रहें। खरपतवारों का प्रकोप ज्यादा बढऩे पर खरपतवारनाशी का भी प्रयोग कर सकते हैं। ऊँची उठी हुई क्यारियों की समय समय पर मिट्टी चढ़ाते रहें। जिससे पौधों की जड़ों के आस-पास पानी के रूकने की सम्भावना कम होती है एवं साथ ही पौधों को गिरने से भी बचाया जा सकता है। पौधों पर रोगों का प्रकोप कम ही होता है। कभी-कभी पत्तियों एवं तनों के सडऩे एवं धब्बों वाली बीमारियों के प्रकोप को देखा गया है। जो कि फफूंदी जनित बीमारी है। इसकी नियंत्रण के लिए मैंकोजेब, रिडोमिल, डाइथेन एम-45 का प्रयोग 2.0-2.5 ग्राम/ली. पानी में डालकर छिड़काव करने से किया जा सकता है। ग्वारपाठा के पौधों को अधिक पानी की आवश्यकता नहीं होती है, परंतु खेत में हल्की नमी बनी रहे व दरारें नहीं पड़ना चाहिए। इससे पत्तों का लुबाब सूख कर सिकुड़ जाते हैं। बरसात के मौसम में संभालना ज्यादा जरूरी होता है। खेत में पानी भर जाए तो निकालने का तत्काल प्रबंध करें। लगातार पानी भरा रहने पर इनके तने (पत्ते) और जड़ के मिलान स्थल पर काला चिकना पदार्थ जमकर गलना शुरू हो जाता है।
फसल की कटाई एवं उपज :
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रोपाई के 10-15 महिनों में पत्तियाँ पूर्ण विकसित एवं कटाई के योग्य हो जाती हैं। पौधे की ऊपरी एवं नई पत्तियों की कटाई नहीं करें। निचली एवं पुरानी 3-4 पत्तियों को पहले काटना/तोडें। इसके बाद लगभग 45 दिन बाद पुन: 3-4 निचली पुरानी पत्तियों की कटाई/तुड़ाई करें। इस प्रकार यह प्रक्रिया तीन-चार वर्ष तक दोहराई जा सकती है। एक हेक्टेयर क्षेत्रफल से लगभग प्रतिवर्ष 50-60 टन ताजी पत्तियों की प्राप्ति होती है। दूसरे एवं तीसरे वर्ष 15-20 प्रतिशत तक वृद्धि होती है। यदि ग्वारपाठे के एक स्वस्थ पौधे से 400 ग्राम (मिली) गूदा भी निकलती है यदि इसका कम से कम बिक्री भाव 100 रु. प्रति किग्रा भी लगाया जाए तो आठ लाख रुपए होता है। ये सब अनुमानित आकलन है वैसे पत्तियों को सीधा काट कर बेचा जाये तो 3 से 6 रूपये किलो बाजार में बिकती है और एक पोधे में ओसत 3 से 5 किलो वजन आता है |  3 से 5 लाख प्रति एकड़ कमा सकते हो |
कटाई उपरान्त प्रबंन्धन एवं प्रसंस्करण :
विकसित पौधों  से निकाली गई, पत्तियों को सफाई करने के बाद स्वच्छ पानी से अच्छी तरह से धो लिया जाता है, जिससे मिट्टी निकल जाती है। इन पत्तियों के निचले सिरे पर अनुप्रस्थ काट लगा कर कुछ समय के लिए छोड़ देते हैं, जिससे पीले रंग का गाढ़ा रस निकलता है। इस गाढ़े रस को किसी पात्र में संग्रह करके वाष्पीकरण की विधि से उबाल कर, घन रस क्रिया द्वारा सुखा लेते है। इस सूखे हुए द्रव्य को मुसब्बर अथवा सकोत्रा, जंजीवर, केप, बारवेडोज एलोज एवं अदनी आदि अन्य नामों से से विश्व बाजार में जाना जाता है। (घृतकुमारी) की जातिभेद एवं रस क्रिया में वाष्पीकरण की प्रक्रिया के अन्तर से मुसब्बर के रंग, रूप, तथा गुणों में भिन्नता पाई जाती है।
साभार कृषि हेल्प लाइन
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